ہیڈ لائنز

ज़िक्र-ए-शुहदाए करबला कांफ्रेंस का रूहानी आयोजन

के.जी.एन. एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट के तत्वावधान में के.जी.एन. एजुकेशन सेंटर फॉर तहीफ़िज़-ए-क़ुरआन एंड थियोलॉजी में एक प्रभावशाली और रूहानी "ज़िक्र-ए-शुहदाए करबला" कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। इस मौके पर शहर और आसपास के इलाक़ों से तशरीफ़ लाए नामवर उलेमा-ए-दीन ने शिरकत की और हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके साथियों की कुर्बानी को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया।

💠 सम्मेलन की सदारत:

प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मुफ़्ती डॉ. मुजीबुर्रहमान अलीमी (मैनेजिंग ट्रस्टी, के.जी.एन. ट्रस्ट) ने सम्मेलन की सदारत की। अपने प्रभावशाली समापन भाषण में उन्होंने कहा:

"कर्बला के शहीदों की कुर्बानी इस्लाम की हिफाज़त की बुनियाद है। नौजवान नस्ल को उनके उसूलों और किरदार से रहनुमाई लेनी चाहिए।"

🌟 मुख्य अतिथि उलेमा-ए-किराम:

  • हज़रत मौलाना साक़िब अलीमी

  • हज़रत मौलाना ज़ैनुल आबिदीन

  • हज़रत डॉ. फसीहुज़्ज़मां क़ादरी

  • हज़रत मौलाना मुतिउर्रहमान रज़वी

  • हज़रत मुफ़्ती अख्तर अली चिश्ती

  • हज़रत मौलाना मुहम्मद रज़ा सईदी

इन उलेमा-ए-किराम ने इमाम हुसैन की शहादत को हुर्रियत, हक़गोई और सब्र व इस्तिक़ामत की अलौकिक मिसाल बताया।

🎓 इमाम हुसैन स्कॉलरशिप वितरण:

इस कांफ्रेंस की विशेष बात यह रही कि “इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम स्कॉलरशिप” के अंतर्गत 20 होनहार छात्रों को शैक्षणिक सहायता और सम्मान प्रदान किया गया। यह छात्र के.जी.एन. एजुकेशन सेंटर फॉर तहीफ़िज़-ए-क़ुरआन व दीनीयत से संबंधित हैं, जिन्हें हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन और दीनी तालीम में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए चुना गया।

👨‍👩‍👧‍👦 शिरकत और समापन:

इस रूहानी महफ़िल में सेंटर के छात्र-छात्राओं, उनके अभिभावकों और दूर-दराज़ से आए मेहमानों ने बड़ी संख्या में शिरकत की। मुनक़बत, सलात व सलाम और दुआ-ए-फातिहा के साथ कार्यक्रम का समापन एक मोहब्बत भरे माहौल में हुआ।


यह आयोजन न सिर्फ़ एक मज़हबी ताआल्लुक का ज़रिया था, बल्कि नई नस्ल को इस्लामी उसूलों की बुनियाद पर तरबियत देने की एक नेक पहल भी साबित हुआ।

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